बेहद शर्मनाक! बोर्ड परीक्षाओं में इन 55 सरकारी स्कूलों में एक भी विद्यार्थी पास नहीं

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साक्षरता दर 82.80 फीसदी होने का दंभ भरने वाले हिमाचल के 55 सरकारी स्कूलों में बोर्ड की परीक्षाओं में एक भी विद्यार्थी पास नहीं हो पाया है। जमा दो के 16 और मैट्रिक स्तर के 39 स्कूल इस फेहरिस्त में शामिल हैं। जमा दो और दसवीं के वार्षिक परीक्षा परिणाम के बाद शिक्षा बोर्ड ने जब समीक्षा रिपोर्ट तैयार की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

शिक्षा बोर्ड की यह रिपोर्ट करोड़ों रुपये खर्च कर बेहतर तालीम देने के सरकारी दावों के साथ-साथ मोटी तनख्वाह पाने वाले शिक्षकों और शिक्षा नीति पर भी सवाल खड़ा कर रही है। जमा दो और दसवीं परीक्षाओं में 396 स्कूलों के 25 फीसदी विद्यार्थी भी पास नहीं हो सके। इसके विपरीत 785 सरकारी स्कूलों में परिणाम सौ फीसदी रहा है।

यहां एक भी बच्चा पास नहीं

प्रतीकात्मक तस्वीर

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प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की जमा दो की परीक्षा में कांगड़ा और मंडी से 4-4, बिलासपुर और लाहौल-स्पीति से 3-3, चंबा और सिरमौर से 1-1 स्कूल ऐसा है, जहां एक भी बच्चा पास नहीं हुआ। जमा दो और दसवीं के 396 स्कूलों में मात्र 25 फीसदी से कम परीक्षा परिणाम रहा है। इनमें जमा दो के 91 और दसवीं के 305 स्कूल शामिल हैं।

जमा दो के 309 स्कूलों में 50 फीसदी, 726 में 80 और 994 स्कूलों में 80 से 100 फीसदी रिजल्ट रहा है। यही हाल दसवीं बोर्ड के परीक्षा परिणाम का है। इसके अलावा 743 स्कूलों में सिर्फ 50 और 1350 स्कूलों में 80 फीसदी बच्चे पास हुए हैं। 1394 स्कूल ऐसे भी हैं, जहां 80 से 100 फीसदी बच्चे पास हुए हैं।

जमा दो के 336 स्कूलों का सौ फीसदी परीक्षा परिणाम रहा। इसी तरह दसवीं के 449 स्कूलों में भी कोई विद्यार्थी फेल नहीं हुआ है। शिक्षा बोर्ड ने जमा दो के 2120 और दसवीं में 5034 सरकारी स्कूलों में रिजल्ट की समीक्षा रिपोर्ट बनाई है।

100 फीसदी रिजल्ट देने में ये जिला अव्वल

प्रतीकात्मक तस्वीर

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जमा दो में सौ फीसदी रिजल्ट देने में शिमला जिला 98 स्कूलों के साथ अव्वल रहा। इसी तरह बिलासपुर के 9, चंबा के 22, हमीरपुर के 2, कांगड़ा के 58, किन्नौर के 5, कुल्लू के 9, लाहौल-स्पीति के 13, मंडी के 45, सिरमौर के 16, सोलन के 20, ऊना के 36 स्कूलों का रिजल्ट 100 फीसदी रहा है।

कांगड़ा से 18 स्कूलों में सिर्फ 25 फीसदी बच्चे पास- जमा दो में कांगड़ा जिले के सबसे ज्यादा 18 स्कूल ऐसे हैं, जहां 25 फीसदी बच्चे पास हो पाए। इसी तरह बिलासपुर से 10, चंबा से 2, हमीरपुर से 13, किन्नौर से 1, कुल्लू से 5, लाहौल-स्पीति से 3, मंडी से 16, शिमला से 5, सिरमौर से 10, ऊना से 1 और सोलन से 2 स्कूल ऐसे रहे, जहां 25 फीसदी बच्चे पास हो पाए।

खराब रिजल्ट का कारण पता लगाएंगे- शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि परीक्षा परिणाम के बाद समीक्षा रिपोर्ट बोर्ड ने तैयार कर ली है। 55 सरकारी स्कूलों में एक भी विद्यार्थी पास क्यों नहीं हो पाया, इसके कारण पता लगाकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

बीते साल 51 स्कूलों में एक भी विद्यार्थी नहीं हुआ था पास

प्रतीकात्मक तस्वीर

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दसवीं और जमा दो कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं में साल 2017 के दौरान 51 सरकारी और निजी स्कूलों में एक भी विद्यार्थी पास नहीं हुआ था। दसवीं में 37 स्कूलों और जमा दो में 14 स्कूलों का वार्षिक परिणाम शून्य रहा था। प्रदेश के 344 स्कूलों का परिणाम 25 फीसदी से कम रहा था।

दसवीं कक्षा में जीरो रिजल्ट देने वाले स्कूलों में सबसे अधिक संख्या जिला शिमला की थी। जिला शिमला के नौ स्कूलों का परिणाम शून्य रहा था। जिला कांगड़ा के सात, मंडी के छह, चंबा में चार, किन्नौर में दो, कुल्लू में दो, लाहौल-स्पीति में दो, सिरमौर में दो, सोलन में दो और ऊना जिला में एक स्कूल का परीक्षा परिणाम शून्य रहा था।

जमा दो कक्षा में मंडी जिला के छह, कांगड़ा के पांच और जिला शिमला के दो स्कूलों का परिणाम शून्य था। हमीरपुर जिला में एक भी स्कूल का परिणाम शून्य नहीं रहा था। जिला के सिर्फ सात स्कूलों का दसवीं और तीन स्कूलोें का जमा दो कक्षा में वार्षिक परिणाम 25 फीसदी से कम था।

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