बसों में कितनी हो सकती है ओवरलोडिंग, हिमाचल सरकार

overloading in buses

कुल्लू के बंजार में बस हादसे के बाद अब बसों में ओवरलोडिंग पर प्रतिबंध के बाद जगह-जगह प्रदर्शन हो रहें हैं, जिसके चलते बुधवार को परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर और मुख्य सचिव बीके अग्रवाल ने परिवहन अधिकारियों के साथ बैठक की।

गोविंद ठाकुर ने पहले अफसरों की बैठक ली और इसके बाद मुख्य सचिव ने भी अफसरों से चर्चा की। अफसरों से पूछा गया कि बसों में कितनी ओवरलोडिंग की जा सकती है, इस संबंध में एक दिन के भीतर गणना कर रिपोर्ट देने को भी कहा गया।

साथ ही बैठक में कालाअंब और पांवटा साहिब में इलेक्ट्रॉनिक बूम बैरियर स्थापित करने का फैसला भी लिया गया। जिससे की ओवरलोडिंग बसों के चालान स्वयं होंगे। बस में सीट से ज्यादा सवारियां पाई जाती हैं, उनका चालान किया जा रहा है। कई बसों से छात्रों और अन्य लोगों को उतारा जा रहा है, जिस वजह से जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं।

बैठक में लिए गए ये निर्णय :
परिवहन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के रिक्त पदों को जल्द भरा जाएगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में 124 नए रूट दिए जाएंगे।
प्रदेश की 2982 स्कूल बसों में से 1769 की जांच की जा चुकी है, शेष की अगले 3 माह में जांच पूरी की जाएगी।
सड़क सुरक्षा जागरूकता के लिए प्रदेश के सभी चुने हुए प्रतिनिधियों की मदद ली जाएगी।
जहां ओवरलोडिंग की समस्या है, उन क्षेत्रों में अस्थायी परमिट जारी किए जाएंगे।
जो निजी बस ऑपरेटर रूट पर नहीं चल रहे हैं, उनके परमिट रद्द किए जाएंगे।
राजस्व में वृद्धि के लक्ष्य को तय सीमा से पूर्व प्राप्त करना।
कांट्रेक्ट कैरेज बसों के संचालन को रेगुलेट किया जाएगा ताकि यात्रियों को असुविधा न हो।
कर जमा करने वाले ट्रांसपोर्टरों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जाएगा।
अगले दो वर्षों में मशीनों से वाहनों की फि टनेस जांची जाएगी।

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