दुबई में काम करने वाले भारतीयों और पर्यटकों के लिए खुशखबरी, यूएई हवाईअड्डों पर अब रुपये में कर सकेंगे लेनदेन

dubai airport

यूएई में भारत के बहुत से लोग काम करते हैं या हम घूमने वहां जाती हैं तो बता दें की वहां पर रहने वाले भारतीयों और पर्यटकों के लिए एक बहुत अच्छी खबर सामने आई है। वह ये है की अब दुबई के सभी हवाईअड्डों पर भारतीय मुद्रा ‘रुपये’ चल सकते हैं यानि आप अपना लेनदेन वहां रुपये में कर सकेगें। दुबई एयरपोर्ट के तीनों टर्मिनल और अल मख्तूम हवाईअड्डे पर भी अब भारतीय मुद्रा यानि रुपये लेना शुरू कर दिया गया है।

भारतीय मुद्रा को लेनदेन के लिए स्वीकार किया जाना देश के पर्यटकों और आने भारतियों के लिए भी बहुत अच्छी खबर है क्योंकि उन्हें रुपये को दूसरी मुद्राओं में परिवर्तित कराने के लिए ही बड़ी राशि गंवानी पड़ती थी। यूएई से प्रकाशित एक अखबार ‘गल्फ न्यूज’ से ही पता चला कि रुपया दुबई में ड्यूटी फ्री दुकानों पर स्वीकार की जाने वाली 16वीं मुद्रा है। पिछले साल दुबई हवाईअड्डे से लगभग 9 करोड़ यात्री गुजरे थे, इनमें 1।22 करोड़ भारतीय थे।

इससे पहले भारतीय यात्रियों को यूएई हवाईअड्डों पर ड्यूटी फ्री दुकानों से खरीददारी करने के लिए सामान की कीमत डॉलर, दिरहम अथवा यूरो में अदा करनी पड़ती थी। इसके साथ ही अब भारत से वहां काम करने गए भारतियों को भी इससे फायदा होगा, क्योंकि उनके पास मौजूद रुपयों का उपयोग वो लोग एयरपोर्ट पर कर सकेगें।

एयरपोर्ट व्यवसाय में 18 फीसदी हिस्सेदारी भरतीयों की
‘खलीज टाइम्स’ की एक खबर के मुताबिक ड्यूटी फ्री के चलते 2018 में भारतीय यात्रियों से दुबई एयरपोर्ट पर दो अरब की वार्षिक बिक्री दर्ज की गई है। यह अपने व्यवसाय की 18 फीसदी हिस्सेदारी है। दुबई ड्यूटी फ्री के चलते मौजूदा समय में 47 विभिन्न देशों के 6000 से ज्यादा कर्मचारियों को रोजगार मिला हुआ है। इनमें भारतीयों की तादाद सबसे ज्यादा है।

भारत-यूएई के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने की पहल
भारत और दुबई के बीच व्यापार व निवेश को बढ़ाने की एक पहल की गई है। इसके लिए जेबेल अली बंदरगाह और जाफजा जोन बंदरगाह की शुरुआत हुई है। इन दोनों के लिए दुबई स्थित बंदरगाह संचालक और भारतीय व्यापार हितग्राहियों के बीच एक साझेदारी हुई है। हाल के डीपी वर्ल्ड इंडियन ट्रेडर्स के बाद जाफजा वन में इनक्यूबेशन सेंटर की शुरुआत की थी।

इस पहल का मकसद प्रतिभाशाली भारतीयों के लिए मध्य पूर्व बाजारों में व्यवसायों को साझा मंच मुहैया कराना है। भारत मुख्य रूप से यूएई के सबसे बड़े व्यापार साझेदारों में से एक रहा है, जिसकी जिसकी वार्षिक बढ़त 60 अरब डॉलर से अधिक है।

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