मोदी सरकार ने पुरानी परंपरा तोड़ के एक नई परंपरा शुरू की, अब की बार लाल कपड़े में दिखा बजट

union budget 2019

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आजादी के समय से चली आ रही परंपरा को खत्म कर इस बार वो ब्रीफकेस की जगह लाल कपड़े में बजट लेकर दिखी। इससे पहले तक बजट ब्रीफकेस में ही लाया जाता था।

इससे पहले भी मोदी सरकार कई परंपराओं को बजट में तोड़ चुकी है। सबसे पहले रेल बजट को खत्म किया था, फिर बजट को पेश करने की तारीख बदली और अब ब्रीफकेस में बजट को ले जाने की परंपरा को भी खत्म कर दिया है। अब तक पेश करने के लिए वित्त मंत्री एक ब्रीफकेस में ही बजट लेकर संसद पहुंचते थे। लेकिन इस बार सीतारमण बजट लाल रंग के सीलबंद कवर पैक में ले जाते हुए दिखी।

पहले की बात करें तो बजट को पहले फरवरी महीने के आखिरी कारोबारी दिन को 27 या फिर 28 फरवरी को पेश किया जाता था। लेकिन वहीं अब इसे फरवरी की पहली तारीख को पेश किया जाता है। इसके अलावा बाजपेयी सरकार के कार्यकाल में बजट पेश करने का समय शाम पांच बजे के बजाए दिन के 11 बजे किया गया था। वहीं रेल बजट आम बजट से एक दिन पहले आता था, लेकिन अब इसे भी केंद्रीय बजट में पूरी तरह से मिला दिया गया है।

वहीं अगर हम लाल रंग के सीलबंद कवर की बात करें तो मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति ने कहा कि यह बहीखाता है, जिसे आज भी कई व्यापारी अपने कारोबार में इस्तेमाल करते हैं। बही खाता हमारे पुराने जमाने की वर्षों से चली आ रही परंपरा है। देश के पहले वित्त मंत्री आरके चेट्टी ने भी बजट को ब्रीफकेस में ले जाने की परंपरा को शुरू किया था। हालांकि मोरारजी देसाई और कृष्णमचारी बजट को फाइल में ही लेकर के गए थे।

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